माँ के दर्शन को दिल मेरा बेचैन हो गया | जीण माता भजन

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुनकर के मईया के चर्चे हज़ार ,

पहुंचा मैं जम्मा के गोरिया दरबार ,

देखा नजारा तो चकरा गया , सोचने लगा मैं कहाँ आ गया ,

लगी ऐसी लगन , हुआ मस्त मगन ,

माँ के दर्शन को दिल मेरा बेचैन हो गया ...जय हो !!

मैं तो भंवरावाली जीण माँ का फैन हो गया - ४

देखी जो माँ की मूरत इक नजर , छाने लगा मुझपे ऐसा असर - २

किरपा मुझपे माँ की होने लगी , सुख दुःख से मैं हो गया बेखबर ,

लगी ऐसी लगन , हुआ मस्त मगन ,

माँ के चरणों से अब ऐसा प्रेम हो गया ...जय हो !!

मैं तो भंवरावाली जीण माँ का फैन हो गया - ४

करता हूँ प्रॉमिस हर नवरात में , लेकर निशान अपने हाँथ में ,

सौरभ मधुकर तेरे मंदिर में माँ , आऊंगा परिवार के साथ में ,

लगी ऐसी लगन , हुआ मस्त मगन ,

हर साल यहाँ आने का प्लान हो गया ...जय हो !!

मैं तो भंवरावाली जीण माँ का फैन हो गया - ४

फैन हो गया रे मैं तो फैन हो गया ,

भंवरावाली जीण माँ का फैन हो गया ।

भजन गायक - सौरभ मधुकर

भजन रचयिता - सौरभ मधुकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।