खोलो खोलो खोलो अब तो करुणा के द्वार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

खोलो खोलो खोलो अब तो करुणा के द्वार मेरी माँ,

बड़ी आस लेके आये तेरे दरबार माँ तेरे दरबार माँ,

खोलो खोलो खोलो अब तो करुणा के द्वार मेरी माँ,

हमे तरसाओगी बताओ कब तक माँ,

तेरे ही खजानो पे है हमारा भी तो हक माँ,

कमी क्या है तुझे तेरे भरे भण्डार माँ,

खोलो खोलो खोलो अब तो करुणा के द्वार मेरी माँ,

युगो से है भगतो को आये हो माँ तारने रोते को हसाती आई रे,

गिरे को संभालती,

तेरे ही तो आसरे है सारा संसार माँ,

खोलो खोलो खोलो अब तो करुणा के द्वार मेरी माँ,

थोड़ा बहुत हमको भी तुझसे जो मिलेगा,

रेहमतो की कोष्टा को तो कोना भी न होलेगा,

अब न करो और इन्तजार माँ,

खोलो खोलो खोलो अब तो करुणा के द्वार मेरी माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।