घाटे वाले ने अंगना में पलन झुलाया

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

घाटे वाले ने अंगना में पलन झुलाया,

अंगना में पलन झुलाया,

ऐसी दया करि बाबा ने भज गए ढोल नगाड़े,

घर गुण और अगड़ परोसा होये गुंड के लाडे,

घाटे वाले ने अंगना में पलन झुलाया,

जगसा जगनि और वधाई गावन लगी लुगाई,

घाटे वाले की किरपा से फूली नहीं समाई,

घाटे वाले ने अंगना में पलन झुलाया,

स्व मणि का रोट लगाया देखु लाल लंगोटा,

बाबा के मन गढ़वा रहता चांदी का एक सोटा,

घाटे वाले ने अंगना में पलन झुलाया,

अशोक भगत पे हाथ धरा और हो गए वारे न्यारे,

सारी रात तेरा होया जगराता सब ने नरिंदर गावे,

घाटे वाले ने अंगना में पलन झुलाया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।