आयी शिव रात चले भोले डमरू वाले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आयी शिव रात चले भोले डमरू वाले,

शिव की बारात चली गोरा जी को व्याहने

देव अच् किनार है भूतो की पल्टन,

चली है चुड़ैले देखो आज बड़ी बन ठन,

झूम झूम नाच रही जोगियां छम छम छम

पीट रहे डम डम ढोल रे नगाड़े,

आयी शिव रात चले भोले डमरू वाले,

हलचल मची है आज नगरी में सारी,

देख देख भाग रहे नर और नारी,

दूल्हा है या कोई आया मदारी,

कान में विशु गले नाग है काले,

आयी शिव रात चले भोले डमरू वाले,

गोरा जी की माँ को हुई है हैरानी,

राजा हिमाचल ने करि मन मनानी ,

देख देख गोरा तो मन मुस्कानी,

शिव के गले में गोरा वर माला डाले ,

आयी शिव रात चले भोले डमरू वाले,

कोई भुत मोटा कोई कद का छोटा,

कोई नित नंगा कोई पेहने लंगोटा,

कोई भंग घोट रहा लेके कुण्डी सोटा,

आयी शिव रात चले भोले डमरू वाले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।