तेरी नूरी ज्योत माँ जिथे जिथे जगदी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी नूरी ज्योत माँ जिथे जिथे जगदी ,

सूखा वाली गंगा ओथे रेहँदी वग दी,

तेरी नूरी ज्योत माँ जिथे जिथे जगदी ,

लाल सुहा चोला माये गल विच पाया

मथे उते चन दा तिलक लगाया है,

फेर भी सवारी बड़ी प्यारी लगदी,

तेरी नूरी ज्योत माँ जिथे जिथे जगदी ,

ओहना दियां आसा माये कर दी तू पूरियां

तेरे कॉल आउंदे जेहड़े कट मजबूरियां,

तनु है खबर माये सारे जग दी,

तेरी नूरी ज्योत माँ जिथे जिथे जगदी ,

ज्योति दी लाली विच तन मन रंग के,

जो भी दिल करे आज माँ कोलो मंगके,

खोल के खजाने बैठी दाती जग दी,

तेरी नूरी ज्योत माँ जिथे जिथे जगदी ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।