चल रे बाई प्रभु की नगरियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चल रे बाई प्रभु की नगरियां चल री बेहना प्रभु की नगरियां,

प्रभु के नगर बड़ी सूंदर डगरियाँ ,

चल रे बाई प्रभु की नगरियां

जो भी तेरा मन में भाये सब की खेल रचाये,

ना जाने पीछे का कोई सब की प्यास बुजाये

मोह माया के जाल में भरी सोने गगरियाँ

चल रे बाई प्रभु की नगरियां

बचपन खेल कूदो में बीता जवानी होश गवाए,

अपने ही जाल में फसा बुढ़ापा सोच सोच पछताए ,

किस की खातिर तोड़े जोड़े बीती रे उमरियाँ,

चल रे बाई प्रभु की नगरियां

जीवन गवा दिया तूने अपनों को सजाने में,

परम पिता परमेश्वर को बुला दियां अनजाने में,

चल अकेला अब जीवन का छोटे रे बजरियाँ,

चल रे बाई प्रभु की नगरियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।