आ दरश दिखा दे मेरी माँ तुझे तेरे लाल बुलाते हैं

सौरभ मधुकर
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॥ पावन पाठ ॥

आ दरश दिखा दे मेरी माँ तुझे तेरे लाल बुलाते हैं - २

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन - २

तुझे तेरे लाल बुलाते हैं....

आ दरश दिखा दे मेरी माँ तुझे तेरे लाल बुलाते हैं - २ ॥

आँखों के आंसू सूख चुके माँ, अब तू दरश दिखा दे,

कब से खड़ा माँ दर पे तेरे, मन की तू प्यास बुझा दे ।

तेरी लीला निराली मेरी माँ, तुझे तेरे लाल बुलाते हैं ।

आ दरश दिखा दे मेरी माँ तुझे तेरे लाल बुलाते हैं ॥

बीच भंवर में नईया पड़ी माँ, आकर तू पार लगादे,

तेरे सिवा माँ कोई नहीं है, आकर तू गले से लगा ले ।

क्यूँ देर लगावे मेरी माँ, तुझे तेरे लाल बुलाते हैं ।

आ दरश दिखा दे मेरी माँ तुझे तेरे लाल बुलाते हैं ॥

डूब रहा है सुख का सूरज, गम की बदरिया है छाई ,

उजड़ गयी बगिया जीवन की, मन की कलि मुरझाई ।

करे विनती ये सेवक माँ, तुझे तेरे लाल बुलाते हैं ।

आ दरश दिखा दे मेरी माँ तुझे तेरे लाल बुलाते हैं ॥

भजन गायक - सौरभ मधुकर

संपर्क - 9831258090

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।