साडा बांके बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साडा बांके बिहारी साडा कुञ्ज बिहारी,

नैन मटकावे जादू चलावे कुञ्ज बिहारी,

नैना दे नाल नैन मिलावे नैन मिला के दिल न चुरावे कर जांदा है कमाल,

साडा बांके बिहारी साडा कुञ्ज बिहारी,

राज एहदे परदे दा किसे भी न पाया है,

परदे च रह के चैन सब दा चुराया है,

अपना बनावे बांके बिहारी चरनी लगावे कुञ्ज बिहारी,

भगता दा रखे ख़याल,

साडा बांके बिहारी साडा कुञ्ज बिहारी,

दर एहदा दुनिया च सब तो निराला है,

आवे इक वारि ओह ता किस्मत वाला है,

जह्नु एह बुलानदा बांके बिहारी कदे न बुलंदा कुञ्ज बिहारी,

ओहनू बुलानदा हर साल

साडा बांके बिहारी साडा कुञ्ज बिहारी,

कोई न निभावे एह तोड़ निभन्दा है ,

लगियाँ निभावे जीहदे नाल याराना है,

यार यार दा बांके बिहारी प्यार प्यारा दा कुञ्ज बिहारी,

लांदा गल दे नाल,

साडा बांके बिहारी साडा कुञ्ज बिहारी,

रोम रोम रमैया रसिक बिहारी दिल विच थामेया अमर बिहारी,

गोपली पागल दा बांके बिहारी रसिका पागल दा कुञ्ज बिहारी,

पागला दा रखवाल साडा बांके बिहारी साडा कुञ्ज बिहारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।