शरद की पूनम पर जो भी कड़छा जाते हैं

राधेकृष्णा लेखनी
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॥ पावन पाठ ॥

शरद की पूनम पर जो भी कड़छा जाते हैं ।

गुरूवर टेकचंद जी उनको गले से लगाते हैं ॥

समाधी उत्सव होता है भारी ,

जानती है जिसको दुनिया सारी ।

गुरू यहाँ आशीष बरसाते हैं ॥

फुलो से मंदिर सजता है न्यारा ,

स्वर्ग से सुंदर लगता नजारा ।

जब थोडा सा गुरूवर मुस्काते है ॥

पूनम की आरती का नजारा ,

देखने तरसता जिसे जग सारा ।

गुरूवर जब अमृत बसराते है ॥

भाव से कड़छा धाम जो आता ,

पल भर में उसको सब मिल जाता ।

नवयुवक गुरू मिल जाते हैं ॥

लेखक - राधेकृष्णा लेखनी

सिंगर - योगेश प्रशांत

नागदा धार म.प्र.

8269337454

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।