गोद में गजानन मचल गयो रे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गोद में गजानन मचल गयो रे,

चंदा मांगे खेलन को मैं ना देऊँ रे,

गोद में गजानन मचल गयो रे,

चंदा मांगे खेलन को मैं ना देऊँ रे,

पहनन को मांगे वो धोती और कुर्ता,

पीताम्बर के लाने मचल गयो रे,

गोद में गजानन मचल गयो रे,

चंदा मांगे खेलन को मैं ना देऊँ रे,

खाने को मांगे वो रबड़ी और खाजा,

खाने को मां गे वो मेवा मिठाई ,

मोदक के लाने मचल गयो रे,

गोद में गजानन मचल गयो रे,

चंदा मांगे खेलन को मैं ना देऊँ रे,

खेलन को मांगे वो हाथी और घोड़ा,

मूशा के लाने मचल गयो रे,

गोद में गजानन मचल गयो रे

चंदा मांगे खेलन को मैं ना देऊँ रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।