खुल्ला खुल्ला केश माँ

अशोक जांगिड़
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

खुल्ला खुल्ला केश मां की,

सूरत है लुभावनी।

भक्ता के बेगी आजो जी ,

सातु बेहणीयां पावाणी।।

ग्यारवी सदी के माई,

दे पाचारण के घर मे।

कन्या जन्मी सात ,

जाकी सूरत मन भावानी,

भगता के,,,,,,,

सबसु बड़ी बिजासन माता ,

इंदरगढ़ पूजवाई सा।

दूजी कन्या रामगढ़ में ,

बैठी रामा बाई सा

भगता के,,,,,

तीजी कन्या लाल बाई,

डूंगर गढ़ पूजवाई सा।

बरवाड़ा की चौथ भवानी,

चौथी बहिण बताई सा।।

खुल्ला ,,,,,,,,,

देश धर्म हित सातु बेहणीया,

जन्मी राजस्थान में।

लखन भारती मां माया की,

झांकी है सुवाहनी।।

भगता के ,,,,,,,,,

गायक:अशोक जांगिड़

मोबाइल न:9828123517

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।