दत्तात्रय धुन

पारंपरिक
महादेव भजन गुरुदेव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः

गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः

अनुसया अत्री सुकुमारा । दत्त दयाघन दयावरा ॥

पद्म कमंडलू गधा धारा । त्रिशूल हे शोभे करा ॥

षढवीत आयुढ परी करा । पूर्णानंदा अवतारा ॥

सुभस्मा रुद्राक्षा भरणा । भव भय दु:ख निवारणा ॥

काश्यायांबर वसन धारा । श्री मेघ श्याम सुंदरा ॥

अवधूता हे गिरीवारा । ओझे तेजो द्वीतीधारा ॥

षडभूज मूर्ती वीरा जीता । विश्वरूप हे विश्वंभरा ॥

भक्त प्रिय वज्रपंजरा । दिनांचा उद्धार करा ॥

दत्तात्रया अवतारा । श्रीपाद नरसिंहवरा ॥

नित्य निरंजन ओमकारा । कलयुगी ऐशी आकारा ॥

जन्म घेशी तु पिठापुरा । सचित धन तु शुभम करा ॥

शाश्वत पावन तपोवरा । शब्द दाविसी ओमकारा ॥

कृष्ण संगमी दरूवरा । नित्य वसे औदुंबरा ॥

विप्ररूप वेराग्य वरा । प्रियजन हे परमेश्वरा ॥

हे मुनिजन मानसचंद्रा । तु गुरु धैर्य समुद्रा

जगधीशा जगत उद्धारा । उद्धरी मज गुरुवरा ॥

करुणानिधी करुणाकारा । निर्गुण हे निर्विकारा ॥

गुरुराया कल्याण करा । निजा नंदी द्रुड करा ॥

चिन्मय चीतघन चीतंबरा । अंतर योगी अगोचरा ॥

ब्रम्हा विष्णू महेश्वरा । स्वामी समर्था कृपा करा ॥

दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।