देवों के देव महादेव

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

देवों के देव महादेव हैं महान,

कैलाश वासी धुँनी रमाऐं,

गले में सर्प और हैं मुंडमाल हैं मुंडमाल,

जय भोले नाथ.,

देवों कू देव महादेव हैं महान...

कंठ में अपने हो विष धारे,

करूणा के ये अवतार हैं,

पीते हो भोले भंगियाँ के प्याले,

तन में भस्मी लगाऐं हैं,

नागेंद्रधारी...प्रलयनकारी

मेरे भोले बाबा ,तुम हो बड़े महान..हो बड़े महान...

जय भोले नाथ....

देवों के देव महादेव हैं..महान...

त्रिशूल ,डमरूँ हाथ विराजे,

करूणा के अवतार हैं।

भाल चंद्रमा माथे में साँजे,

शीश गंगे बहाऐं हैं।

त्रिनेत्रधारी...कामक्रोधहारी...

नाथों के नाथ...भोले नाथ हैं महान...नाथ हैं महान

जय भोले नाथ...

देवों के देव महादेव..हैं महान...

तुम तो हो स्वामी औगढ़दानी,

महिमा तुम्हारी अपार हैं....

देव दानव पूँजे हैं तुमको,

कालों के महाकाल हैं..

भूँत- प्रेत भारी, नंदी की सँवारी..

बाघम्बर धारी महादेव हैं महान...देव हैं महान...

देवों के देव महादेव हैं महान....

कैलाश वाशी धुँनी रमाऐं...

गले में सर्प और हैं मुंडमाल...हैं मुंडमाल...

देवों के देव महादेव हैं महान...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।