दिल ले लिया है मेरा वो नंद के दुलारे

- परम पूज्या संत करुणामयी गुरु माँ
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दिल ले लिया है मेरा वो नंद के दुलारे ।

पनिया भरन गई मैं जमुना नदी किनारे ॥

सर पर मुकुट जड़ा था,

कानो कुंडल पड़ा था,

पनघट निकट खड़ा था,

कर प्रेम के इशारे ।

दिल ले लिया है मेरा वो नंद के दुलारे ॥

गल विच फूल माला,

लोचन परम रसाला,

कटी मेखला विशाला,

तन पीत वसन धारी ।

दिल ले लिया है मेरा वो नंद के दुलारे ॥

बंसी अधर लगाई,

मधुरी धुनी सुनाई,

तन की खबर भुलाई,

घर काज सब विसारे ।

दिल ले लिया है मेरा वो नंद के दुलारे ॥

स्वर :- परम पूज्या संत करुणामयी गुरु माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।