पंख जो होते मैं उड़ जाती

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पंख जो होते मैं उड़ जाती नन्द बाबा के द्वार,

हुलर हुलर मेरा जीवा रोवे भवे दूध की धार,

लाल मेरा रोता होगा वो भूखा सोता होगा ,

कैसी विद्याता ने लीला रचाई,

दूर हुए मुझसे कृष्ण कन्हाई

कोई तो बताओ मुझको दिखाओ कान्हा को इक बार,

हुलर हुलर मेरा जीवा रोवे भवे दूध की धार,

लाल मेरा रोता होगा वो भूखा सोता होगा ,

किस को सुनाऊ पीड़ा ये मन की

कोई न जाने हालत तन की

किसको सुनाऊ किस को बताओ मेरे दिल की पुकार,

हुलर हुलर मेरा जीवा रोवे भवे दूध की धार,

लाल मेरा रोता होगा वो भूखा सोता होगा ,

रोता है मन आँखे भर भर आई,

कौन होगी माँ जो लाल को रुलाये,

कोई तो बताओ मुझको मिलाओ करू मैं यत्न हजार,

हुलर हुलर मेरा जीवा रोवे भवे दूध की धार,

लाल मेरा रोता होगा वो भूखा सोता होगा ,

मेरे जिगर का टुकड़ा दूर जा वसा है,

मेरा तो मन माधव इस में फसा है,

माँ की ममता माँ ही जाने कया जाने संसार

हुलर हुलर मेरा जीवा रोवे भवे दूध की धार,

लाल मेरा रोता होगा वो भूखा सोता होगा ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।