धनशयाम तूझे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

घनश्याम तुझे ढूँढने,

जाए कहाँ कहाँ,

अपने विरह की आग,

अपने विरह की आग,

बुझाए कहाँ कहाँ,

घनश्याम तुम्हे ढूँढने,

जाए कहाँ कहाँ।।

तेरी नजर में जुल्फ में,

मुस्कान जो मधुर,

उलझा है सब में दिल तो,

उलझा है सब में दिल तो,

छुपाये कहाँ कहाँ,

घनश्याम तुम्हे ढूँढने,

जाए कहाँ कहाँ।।

चरणों की खाकसारी में,

खुद खाक बन गए,

अब खाक पे ये खाक,

अब खाक पे ये खाक,

रमाये कहाँ कहाँ

घनश्याम तुम्हे ढूँढने,

जाए कहाँ कहाँ।।

जिनकी तबियत देखकर,

खुद बन गए मरीज,

ऐसे मरीज मर्ज को,

ऐसे मरीज मर्ज को,

दिखाए कहाँ कहाँ,

घनश्याम तुम्हे ढूँढने,

जाए कहाँ कहाँ।।

दिन रात अश्रु बिंदु,

बरसते तो है मगर,

सब तन में लगी आग,

सब तन में लगी आग,

बुझाए कहाँ कहाँ,

घनश्याम तुम्हे ढूँढने,

जाए कहाँ कहाँ।।

घनश्याम तुझे ढूँढने,

जाए कहाँ कहाँ,

अपने विरह की आग,

अपने विरह की आग,

बुझाए कहाँ कहाँ,

घनश्याम तुम्हे ढूँढने,

जाए कहाँ कहाँ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।