रामायण आवाहन दोहे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रामायण आवाहन

जेहि सुमिरत सिध्द होय गण नायक करिवर बदन ।

करहुँ अनुग्रह सोई बुध्दि राशि शुभ गुण सदन ॥

मूक होई वाचाल पंगु चढ़ई गिरिवर गहन ।

जासु कृपासु दयालु द्रवहॅुं सकल कलिमल दहन ॥

नील सरोरुह श्याम तरुन अरुन वारिज नयन ।

करहुँ सो मम उर धाम सदा क्षीर सागर सयन ॥

ह्लाुंँद - इंदु सम देह उमा रमन करुणा अयन ।

जाहिं दीन पर नेह करहुँ कृपा मर्दन मयन ॥

बंदहु गुरु पद कंज कृपा सिंधु नर रुप हरि ।

महा मोह तब पुंज जासु वचन रवि कर निकर ॥

बंदहु मुनि पद कंज रामायन जेहि निर मयऊ ।

सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दुषन सहित ॥

बंदहु चारहुं वेद भव वारिध वो हित सरिस ।

जिनहिं न सपनेहु खेद वरनत रघुपति विमल यश ॥

वंदहु विधि पद रेनु भव सागर जिन कीन्ह यह ।

संत सुधा शशि धेनु प्रगटे खल विष वारुनी ॥

बंदहु अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद ।

बिछुरत दीन दयाल प्रिय तनु तृन इव पर हरेऊ ॥

बंदहु पवन कुमार खल वन पावक ज्ञान घन ।

जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चापधर ॥

राम कथा के रसिक तुम,भक्ति राशि मति धीर ।

आय सो आसन लीजिये, तेज पुंज कपि वीर ॥

रामायण तुलसीकृत कहँऊ कथा अनुसार ।

प्रेम सहित आसन गहँऊ आवहँ पवन कुमार ॥

सियावर रामचंद्र की जय

पं.शान दुबें

चांद (छिंदवाड़ा) म.प्र

मो. 9753443574 / 9755305783

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।