चार दिना रो अठे पामणो आखिर पाछो जावेला

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॥ पावन पाठ ॥

चार दिना रो अठे पामणो २ आखिर पाछो जावेला

चेत सके तो चेत बावला अन्त समय पछतावेला

बाल पणा में दडि़या रमतो घणा ओलिम्बा लावे है

आई जवानी सेजा प्यारी दुनिया ने बिसरावे हैं

आयो बुढापो हाथ में २ अणगिण गोता खावेला

चेत सके तो चेत बावला अन्त समय पछतावेला

पाप री करे है कमाई सगला हिलमिल खावे है

स्वार्थ सुं सब लारे चाले गरज पड्या नट जावे है

जम रा दूत पकड़ ले जावे २ अणगिण सोटा खावेला

चेत सके तो चेत बावला अन्त समय पछतावेला

गहरी नदियां नाव पुरानी जिवडो़ गोता खावे है

राम नाम री बैठ नाव में पापी भी तर जावे है

जा मनडा़ सत् गुरू रे चरणे २ भव सागर तर जावेला

चेत सके तो चेत बावला अन्त समय पछतावेला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।