मेरी पहली मुहब्बत का सलाम याद रखना

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी पहली मुहब्बत का सलाम याद रखना

जहाँ दिल से दिल मिले थे वो मुकाम याद रखना

हम फकीरों की झोली में कुछ भी नहीं

एक प्यार है बस और कुछ नहीं

मेरा इश्क फकीराना औ सुल्तान याद रखना

मेरी पहली मुहब्बत का सलाम याद रखना

जहाँ दिल से दिल मिले थे वो मुकाम याद रखना --------------------

नहीं गम कि इस रस्ते में गम मिले

यही बहुत है कि इस रस्ते में तुम मिले

कोई है दीवाना तेरा ऐ चाँद याद रखना

जहाँ दिल से दिल मिले थे वो मुकाम याद रखना -----------------

तू मेरे दिल की राहत है

तू ही तो मेरी चाहत है

कभी मेरी हो जरूरत तो नाम याद रखना

फुलसंदे की गली में मैं बदनाम याद रखना

मेरी पहली मुहब्बत का सलाम याद रखना

जहाँ दिल से दिल मिले थे वो मुकाम याद रखना ------------------

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।