दिल नहियो लगदा साई बिना

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॥ पावन पाठ ॥

दिल नहियो लगदा साई बिना

और कहा अब जाऊँगा मैं किस को हाल सुनाऊंगा मैं,

कैसे इसे समझाऊंगा,

दिल नहियो लगदा साई बिना

साई नगरियां आके देवा चौकठ तेरी चुमू मैं,

साई दीवाना बन के तेरा गलियां गलियां घुमु मैं,

चाहत में तेरी मैं साई मैं अपना सब कुछ खो बैठा,

छोड़ दी मैंने दुनिया सारी मैं तो तेरा हो बैठा,

दिल नहियो लगदा साई बिना

प्यार में तेरे मेरे साई क्या से क्या मैं हो गया,

ऐसी लग्न लागि है तेरी मैं दीवाना हो गया,

ढूंढ के देखा इस दुनिया में तेरी शान निराली है

तेरे दर से मेरे देवा लौटा न कोई खाली है,

दिल नहियो लगदा साई बिना

याफ में तेरी मेरे साई इक पल चैन न आये है,

दीदार तेरा पाने को ये दिल पागल हो जाए है,

नाम से तेरे मुझको जाने अब ये सारा जामना है,

जो भी देखे वो ये बोले ये साई का दीवाना है,

दिल नहियो लगदा साई बिना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।