तेरे दर पे होली खेले गे अब की बार मेरी मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पे होली खेले गे अब की बार मेरी मैया,

रंग बंसती हम बरसवे तेरे दर पे ज्योत जलावे,

हम सारे संकर सेह लेंगे अब की बार मेरी मैया,

तेरे दर पे होली खेले गे अब की बार मेरी मैया,

तेरी लाल चुनरियाँ कंगना हाथ में,

होली खेले मैया म्हारे साथ में

हम इक दूजे को बेहले गे अब की बार मेरी मैया,

तेरे दर पे होली खेले गे अब की बार मेरी मैया,

हम तो मैया तेरे दीवाने बेशक कोई माने न माने,

मल कर के होली खेले गे अब की बार मेरी मैया,

तेरे दर पे होली खेले गे अब की बार मेरी मैया,

उत्तम छोकर बालक से तेरा बिगड़े बना दे काम तू मेरा,

मनती रहे होली दीवाली खुश है परिवार मेरा,

तेरे दर पे होली खेले गे अब की बार मेरी मैया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।