खेले मसाने में होरी दिगम्बर

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

खेले मसाने में होरी दिगम्बर

भुत पिसाच बटोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी,

लखि सूंदर फागुनी झता के,

मन से रंग गुलाल हटा के,

चिता बसम की झोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी,

नाचत गावत डमरू धारी,

छोडत सर पे गर्ल पिचकारी,

बीते प्रेत थपोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी,

भुत नाथ की मंगल होरी,

देख सिहाये ब्रिज की छोरी,

धन धन नाथ अगोहरी,

दिगंबर खेले मसाने में होरी,

गोप न गोपी श्याम न राधा,

ना कोई रोक न कोहनू वाधा

न साजन न गोरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।