कक्खों लख बनाउँदी मेरी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झंडेवाली आउंदी मेरी माँ,

कक्खों लख बनाउँदी मेरी माँ,

कक्खों लख बनाउँदी मेरी माँ

माँ दे दर दिया जाने बाता,

रौनक शाम सवेरे,

दुनिया रोशन कर दी,

ज्योति करदी दूर हनेरे,

सब नु दरस दिखाउंदी मेरी ,

कक्खों लख बनाउँदी मेरी माँ,

दिल्ली दे मंदिर विच बैठी,

झंडे वाली दाती,

जो भी दर ते आया,

माँ ने खैर झोली विच पाती,

खुशिया झोली पौंदी मेरी माँ

कक्खों लख बनाउँदी मेरी माँ,

राजू भी हरिपुरियाँ,

झंडे वाली दे दर आउंदा ,

माँ दे दर ते भरे हाजरी,

आन चिराग है गोंदा,

इज्जत मान दवांदी मेरी माँ,

कक्खों लख बनाउँदी मेरी माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।