मोहे भी रंग दे कन्हियाँ तेरे रंग में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खेलु गी होली सांवरिया तेरे संग में,

मोहे भी रंग दे कन्हियाँ तेरे रंग में,

रंग लाल गुलाभी केसरियां न भाये ने मुझको रसियां,

रंग तेरे ही रंग में रंग दे ओ श्याम सलोने सांवरियां,

तू रंग रेज रंगीला है तेरे जैसा न और कोई,

जो जीवन भर न उत्तर सके मुझे ऐसा रंग लगा कोई,

होली की मस्ती छाई है अंग अंग में,

मोहे भी रंग दे कन्हियाँ तेरे रंग में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।