नईया पर लगादे शाकम्भरी ए माई

सौरभ मधुकर
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ए मईया थारे से अरज लगाईं ,शाकम्भरी ए माई ,

बिगड़ी बनादे म्हारी मावड़ी , नईया पार लगादे म्हारी मावड़ी |

थारी महिमा शाकम्भरी माँ सारी दुनिया जाने ,

शक्ति थारी है बड़ी भारी , जग सारो पिचाने ,

तू ही रुद्राणी और ब्रम्हाणी , सकराय की हे महारानी ,

बिगड़ी बना दे म्हारी मावड़ी ,ओ नईया पार लगादे म्हारी मावड़ी |

दुर्गम को संहार कियो माँ,शाकम्भरी बन आयी ,

सहस्त्र नैनो से बरस्या आंसू,माँ सताक्षी कुहाई ,

ए मईया साँची तेरी सकलाई,शक्ति रे तेज सवाई ,

बिगड़ी बना दे म्हारी मावड़ी ,ओ नईया पार लगादे म्हारी मावड़ी |

एक सेठ की नांव भंवर में जब थी डूबन लागि ,

टेर सुनी माँ भगत की नईया पल में पार लगादी ,

म्हे भी बालक हाँ तेरा माई , थां बिन कुन होवे सहाई ,

बिगड़ी बना दे म्हारी मावड़ी ,ओ नईया पार लगादे म्हारी मावड़ी |

ए मईया थारे से अरज लगाईं ,शाकम्भरी ए माई ,

बिगड़ी बनादे म्हारी मावड़ी , नईया पर लगादे म्हारी मावड़ी |

भजन गायक - सौरभ मधुकर

संपर्क - 9830608619

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।