तेरा रंग रूप निखर जायगो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरो रंग है कारो चित कब्रों मेरो गोरो रंग बिगड़ जाएगो

राधे रंग मेरो ढिलवालो तेरा रंग रूप निखर जायगो

राधा रंग अलबेलो मेरो आसानी से नहीं छूट ता,

कान्हा मोरे गोर रंग पे कोई रंग नहीं चढ़ता,

मेरे रंग के आगे ओ कान्हा रंग तेरो फीको पड़ जायेगो,

राधे रंग मेरो ढिलवालो तेरा रंग रूप निखर जायगो

तुमसे होली खेले बिना तो मन न मेरा भरता है कान्हा तेरी खुराफात से,

जिया मेरा धड़कता है,

सोच रही थी आज के दिन तो तेरो ढंग सुधर जायेगो,

राधे रंग मेरो ढिलवालो तेरा रंग रूप निखर जायगो

तेरे प्यार में फस के राधा दिल मेरा कुर्बान हुआ,

प्रीत लगा के तुम से मोहन दिल मेरा परेशान हुआ,

कहे अनाड़ी किशरथ के संग तेरो वक़्त सवर जायेगो,

राधे रंग मेरो ढिलवालो तेरा रंग रूप निखर जायगो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।