ब्रह्मानंद गिरी जी की आरती

पारंपरिक
श्री राम आरती विष्णु भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ,

निज भक्तन के तुमने, पूर्ण कारज करे ,

जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ,

रत्नसिंहासन राजत, सेवक भक्त खड़े,

खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योत जरे ,

ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ,

राम मंदिर का सपना, तुमने प्रभु दीना ,

मंदिर तीन शिखर का, निर्मित है कीना ,

ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी ,

आत्मा ज्ञान विरागी, सम दृष्टि धारी ,

माया मोह विनाशक, ज्ञान ज्योति जारी ,

ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी,

जल में भीनं कमल जो, घर में बाल यति ,

राज पाठ सब त्यागे, ममता मोह हती ,

ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी

श्री ब्रह्मानन्द जी की आरती , जो कोई नर गावे

गवत दास ललित गेरा, मनवांछित फल पावे

ॐ जय ब्रह्मानन्द गिरी जी, स्वामी जय ब्रह्मानन्द गिरी जी

।। श्री ब्रह्मानन्द गिरी जी महाराज की जय ।।

@ Compose Aarti By - ललित गेरा (SLG)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।