हे वीणा धारणी मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे वीणा धारणी मैया मेरी नस नस में स्वर भरदो,

जगा दो सात स्वर मेरे मां इतना तो करम करदो,

हे वीणा धारणी मैया मेरी नस नस में स्वर भरदो ....

जो छेड़े ताल वीणा के, मेरी आवाज़ बन जाएं,

तेरा गुणगान करने का, मुझे अंदाज आ जाए,

कभी स्वर ताल ना भूले, मां इतना तू रहम कर दो ,

हे वीणा धारणी मैया मेरी नस नस में स्वर भरदो ....

तेरी आराधना से मां, जो पूरी साधना मेरी,

गुरु का नाम ले करके रहा हूं वंदना तेरी ,

जिधर हो मां चरण तेरे उधर मेरा ये सर कर दो,

हे वीणा धारणी मैया मेरी नस नस में स्वर भरदो ....

मिले वरदान मां तेरा, मुझे संगीत आ जाएं,

जो गाया वेदों में तेरा मुझे वो गीत आ जाएं ,

मुझें सुर ताल ना भूलें जो रहमत की नजर कर दो,

हे वीणा धारणी मैया मेरी नस नस में स्वर भरदो ....

हे वीणा धारणी मैया मेरी नस नस में स्वर भरदो,

जगा दो सात स्वर मेरे मां इतना तो करम करदो,

हे वीणा धारणी मैया मेरी नस नस में स्वर भरदो ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।