बल्ले बल्ले बल्ले बई होगी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बल्ले बल्ले बल्ले बई होगी बल्ले बल्ले,

मेहर करी मेहरा वाले ने हो गये कम सवले,

बल्ले बल्ले बल्ले बई जावा सदके वारी,

आनद कोटि भ्रमनड नायक दुःख बंजन हितकारी,

बल्ले बल्ले बल्ले बई जावा सदके वारी

रहमत दियां वरसाता अज दितियाँ रब ने मुहो मंगियाँ सोगाता,

बल्ले बल्ले बल्ले बई हूँ ता मौजा ही मौजा.

बल्ले बल्ले बल्ले बई करलो नेक कमाइया

इक दूजे नु कहो मुबारक सब नु देवो वधाईयां,

बल्ले बल्ले बल्ले बई जावा सदके वारी

इस तोबत की आखा साईं तेरी मर्जी नु रब दी मर्जी आखा,

बल्ले बल्ले बल्ले भी रल मिल शगन मनाइए,

उचा सुचा साईं मेरा क्यों न वली वली जाइए,

बल्ले बल्ले बल्ले भी रल मिल शगन मनाइए,

बल्ले बल्ले बल्ले भी श्रधा न सबुरी,

बस एहनी जही मंग मंगदा ते करदा आशा पूरी,

बल्ले बल्ले बल्ले भी श्रधा न सबुरी,

दिल दी गल सुन लेनदा,

अपने प्यारेया दे हर दम अंग संग रहंदा,

बल्ले बल्ले बल्ले भी ग्यारा वचन निभावे,

दुखियां दी फरयाद सुने ते रोना आवे,

बल्ले बल्ले बल्ले भी ग्यारा वचन निभावे,

बल्ले बल्ले बल्ले भी छैइया मस्त बहारा,

सुन लियां सचे साहिब ने साहिल दियां पुकारा ,

बल्ले बल्ले बल्ले भी ग्यारा वचन निभावे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।