मेनू नचना नही औंदा सैयां

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॥ पावन पाठ ॥

मेनू नचना नही औंदा सैयां तेरा इश्क्व न्चौन्दा,

डोरा तेरे हथ फ़डाइया वे तेरा इश्क न्चोंदा,

जद सामने साईं हॉवे ते आपे ही पैर ही थिरक दे ने,

जिह्ना वल करे इशारा तू ओह रोक न खुद नु सकदे ने,

एह मस्तियाँ तुहियो चड़ाइया तेरा इश्क न्चोंदा,

खुश किस्मत हुँदै ऑह जेह्ड़े साईं दर नच्दे गाउंदे ने,

बुल्ले शाह वांगु घुंगरू बन नच नच के यार मनाउंदे ने,

अज करनियाँ नेक कमाइया,

तेरा इश्क न्चोंदा,

साईं दे द्वारे नही हुंदी उमीरा दी कोई पाबंदी,

नीके बड़े बचे बूढ़े बन जांदे सब अंगी संगी,

सब न नु होण वदाहियाँ तेरा इश्क न्चोंदा,

हसदे वसदे नच्दे गाउंदे साहिल नु नाल नचाइये जी,

मुहो मंगियाँ दितियाँ सोगाता उस रब दा शुकर मनाइए जी,

रहमत दिया बदलियां छाईयां तेरा इश्क न्चोंदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।