दुलहा बन कर भोले आये

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गले सर्पो की माला तन भस्म रमा के,

हो कर नंदी पर सवार दुलहा बन कर भोले आये है गोरा जी के लाल,

तीनो लोको की स्वामी के बारात में ,

भ्र्म जी विष्णु जी आये है साथ में,

भूत प्रेतों की टोली कर ती चली है ठिठोली आगे भोले पीछे बाराती साथ,

दुलहा बन कर भोले आये है गोरा जी के लाल,

ओड़गदानी का देख के रंग और रूप,

माता मैनावती गबराई कैसा है रूप,

की है गोरा ने विनती स्वामी कुछ तो करो युक्ति जरा सूंदर रूप दिखाओ न,

दुलहा बन कर भोले आये है गोरा जी के लाल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।