पटने शहर दिया गलियां

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

वाहेगुरु वाहेगुरु जपले संगते सारी सांगता चलिया,

चलो सींगो रल साफ़ करो आज पटने शहर दिया गलियां,

आज अम्ब्रा ते परियां ने भी गीत ख़ुशी दे गाउने,

माँ गुजारी दे लाल संगता राह विच फूल बरसोने,

धरती उते चानन होया रोशन होइया गलियां,

चलो सींगो रल साफ़ करो आज पटने शहर दिया गलियां,

पटने शहर दिया सरियाँ कंदा फुला नाल सजाओ,

देसी घी दे बाल के दीवे जग मग दीप जलाओ,

आज गुजरी दे लाल ने आउना भागियां खिलियाँ कलियाँ,

चलो सींगो रल साफ़ करो आज पटने शहर दिया गलियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।