शिव है मेरे मन मंदिर में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव है मेरे मन मंदिर में और कोई न दूजा,

शिव का ध्यान करू मैं निष् दिन शिव ही मेरी पूजा,

शिव मेरा सहाये शिव मुझ में समाये मन मेरा सदा रमाये ॐ नमः शिवाये,

शिव की जटाओ में है माँ गंगा रहती,

शिव चरणों को छू कर है गंगा बहती,

शिव के माथे चंदा है चम चम चमके,

जैसे माँ गोरा के माथे बिंदियां दमके,

शिव शंकर है भोले भाले है शिव जोगी मतवाले,

शिव को पूजे किस्मत वाले शिव सब के मन की जाने,

है जग सारा शिव को माने,

शिव है मेरे मन मंदिर में और कोई न दूजा,

डम डम डमरू की धुन पे नाचे शंकर दुनिया खूब नचके नटराज है बन कर,

नेत्र त्रिशूल अपना शूल मिटाते शरण में आये भगतो के है भाग जगाते,

शिव शंकर है भोले भाले है शिव जोगी मतवाले,

शिव को पूजे किस्मत वाले शिव सब के मन की है जाने,

है जग सारा शिव को माने,

शिव है मेरे मन मंदिर में और कोई न दूजा,

शिव को वसा कर मन में भगति कर बंदे,

शिव सुमिरन से कट ते गम के फंदे,

योग समाधि में शिव है रहते हर दम,

दास पवन तू जपले शिव भोले बम बम,

शिव शंकर है भोले भाले है शिव जोगी मत वाले,

शिव को पूजे किस्मत वाले शिव सब के मन की है जाने,

है जग सारा शिव को माने,

शिव है मेरे मन मंदिर में और कोई न दूजा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।