संत का सत्कार होना चाहिए,

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

संत का सत्कार होना चाहिए,

देव सा व्यवहार होना चाहिऐ ।।

संत को पुजो ना पुजो पंथको,

सत्य का आधार होना चाहिऐ,

देव सा व्यवहार होना चाहिऐ,

संत का सत्कार होना चाहिए ।।

संत वो ही जो संत निर्गर्ंथी है,

शांत मन निर्भार होना चाहिऐ,

देव सा व्यवहार होना चाहिऐ,

संत का सत्कार होना चाहिए ।।

नही नफरत को यहाँ स्थान है,

प्रेममय संसार होना चाहिऐ,

देव सा व्यवहार होना चाहिऐ,

संत का सत्कार होना चाहिए ।।

है सभी अपने यहाँ न कोई गैर है,

विश्व ही परिवार होना चाहिऐ,

देव सा व्यवहार होना चाहिऐ,

संत का सत्कार होना चाहिए ।।

ज्योती चंदन जले पावन प्रेम की,

खुला दिल दरबार होना चाहिऐ,

देव सा व्यवहार होना चाहिऐ ,

संत का सत्कार होना चाहिए ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।