सुख भी हमें प्यारे है

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॥ पावन पाठ ॥

सुख भी हमें प्यारे है दुःख भी हमें प्यारे है,

छोडू मैं किसे साईं दोनों ही तुम्हारे है,

सुख दुःख ही दुनिया की गाड़ी को चलाते है,

सुख दुःख की हम सब को इंसान बनाते है,

सुख कैसे मिले हमको सुख भी तो सहारे है,

छोडू मैं किसे साईं दोनों ही तुम्हारे है,

है जिस में रजा तेरी उस में सुख देखू मैं,

जिस हाल में रखे तू उस में सुख देखू मैं,

मैंने तो तेरे आगे ये हाथ पसारे है,

छोडू मैं किसे साईं दोनों ही तुम्हारे है,

सुख में तेरा शुकर करू दुःख में फरयाद करू ,

जिस हाल में रखे तू मैं तुझको याद करू,

हम तो सदा एह भगवान तेरा आगे हारे है

छोडू मैं किसे साईं दोनों ही तुम्हारे है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।