दादी दादी बोल रे मन

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दादी दादी बोल रे मन दादी दादी बोल - २

आँखों के पट बंद कर - २ , मन के दरवाजे खोल,

दादी दादी बोल रे मन दादी दे बोल ।

कलयुग की अवतारी मईया झुंझुनू में है धाम - २

मिश्री से भी मिठो लागे दादी जी को नाम ,

जप ले माँ का नाम तू - २ , वाणी में अमृत घोल,

दादी दादी बोल रे मन दादी दादी बोल ।

या तू कह ले रानी सती या भज ले माँ नारायणी - २

नाम कई है दादी के,ये तो जग की महारानी ,

पल में रीझ जायेगी माँ - २ ,भाव से तू तोल ,

दादी दादी बोल रे मन दादी दादी बोल ।

"सौरभ मधुकर" इक दिन तुझको ये जग छोड़ के जाना - २

अब भी समय है लूट ले प्यारे दादी नाम खजाना ,

पूँजी दादी नाम की - २ , तू पाई पाई जोड़ ,

दादी दादी बोल रे मन दादी दादी बोल ।

भजन गायक - सौरभ मधुकर

भजन रचयिता एवं संगीत - सौरभ मधुकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।