॥ पावन पाठ ॥
ले मांगता हु अब मेरी हसरत निकल दे,
बेहद गरीब हु मुझे कुछ देके टाल दे,
ले मांगता हु अब मेरी हसरत निकल दे
सुनते है तेरे पास है रहमत का खजाना,
थोडा सा उठा कर मेरी झोली में डाल दे,
ले मांगता हु अब मेरी हसरत निकल दे
हर लम्हा तेरे दीद की प्यासी है निगाहें,
ये मैंने कब कहा तुझे दुनिया का माल दे,
ले मांगता हु अब मेरी हसरत निकल दे
बाबा तू अपने लाल की खुद आप रख खबर,
मैं क्यों कहू के मेरी मुशीबत को टाल दे
ले मांगता हु अब मेरी हसरत निकल दे
अरदास है फलक यही तुमसे बार बार,
फेलाऊ यश तेरा मुझे इतना कमाल दे,
ले मांगता हु अब मेरी हसरत निकल दे