माँ का दिल

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॥ पावन पाठ ॥

माँ का दिल जो कभी न दुखाये गा तू ,

दो दुआ सब पायेगा तू

सांचे में तन के ढाला है तुझको,

जन्म दिया हे पाना है तुझको,

दुःख जो तू माँ को देगा सुख नही होगा,

जब गमो का कभी समाना तू करे सामने माँ को पायेगा तू

माँ का दिल जो कभी

नो नो महीने वोज न समजा वोज तू समजे लाल न तुजसा,

जागी तेरे लिए सारी रतिया,

भगवान भी रे मामता ही करे,

ममता जो लजाएगा तू,

माँ का दिल जो कभी

दुनिया में तेरी पहचान माँ है मुस्कान तेरी भगवान माँ है,

माँ को मनाने इनसे दूर न जा तू,

जो मुकाम मिला माँ की दें सभी प्रेम कर प्रेम पायेगा तू,

माँ का दिल जो कभी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।