मन डगमग डगमग डोले

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मन डगमग डगमग डोले

मैं कैसे भजन करूँगा

मन में विश्वाश न होगा,

मैं कैसे अम्ल करूँगा,

मन डगमग डगमग डोले

साईं श्रधा दो साईं सबुरी दो,

मन में वैर ये है उल्जन,

मुझ पापी को क्या होंगे दर्शन

साईं बाबा से मिलने की मैं कैसे लग्न करुगा,

मन डगमग डगमग डोले

जिब्या साईं रटे गी कैसे,

लख चोरासी कटेगी कैसे,

मन को वश में कर लेगा अमिन कैसे जतन करूँगा,

मन डगमग डगमग डोले

नागर ने जो देखा दर पर ,

व्यर्थ गवाया मैंने जीवन,

मैं अपने अभिमान को तेरे दर पे दमन करूँगा,

मन डगमग डगमग डोले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।