मैं माटी का खिलोना

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मैं माटी का खिलोना,

साईं तुम हो खेलन हार,

मैं कटपुतली हु तेरी,

हर हाल में नाचन हार,

मैं माटी का खिलोना,

मैं मुर्ख और अज्ञानी,

साईं तुम हो पूरण ज्ञानी,

चाहे बीच में मुझे डुबो दो चाहे भव सागर दो तार,

मैं माटी का खिलोना,

ये कैसा खेल रचाया मोह माया में मुझे फसाया,

मैं पापी और दोषी हु साईं तुम हो बक्शन हार ,

मैं माटी का खिलोना,

साईं तुम हो दया के सिन्धु,

नागर छोटा सा इक बिंदु ,

तेरे चरनो से बहती है गंगा यमुना की ये धार ,

मैं माटी का खिलोना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।