जो तेरी ख़ुशी

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॥ पावन पाठ ॥

जो तेरी ख़ुशी वो मेरी ख़ुशी,

तू जो करता जो भी करता अच्छा साईं नाथ,

जो शान में तेरी दखल करू,

औकात है मेरी क्या साईं नाथ,

जो तेरी ख़ुशी वो मेरी ख़ुशी,

हम से ज्यादा चिंता तुझको

हम से ज्यदा परवाह तुझको,

किस हाल में है तेरे बंदे,

तू ध्यान सदा रखता साईं नाथ,

जो तेरी ख़ुशी वो मेरी ख़ुशी,

सुख में अभिमान करू मैं क्यों,

दुःख में बिन मोत मरू मैं क्यों,

सब छोड़ दिया तुझपर दाता,

अब जो भी तेरी ईशा सैयां,

जो तेरी ख़ुशी वो मेरी ख़ुशी,

कुल दुनिया का करता धरता सब का रखता लेखा जोखा,

जब कुछ भी नही है तेरे सिवा,

फिर क्यों करिए सिकवा सैयां,

जो तेरी ख़ुशी वो मेरी ख़ुशी,

उस की जो रजा में रहते है,

उस पर विस्वाश जो रखते है,

साहिल खुद आप ही करता है,

हर दम उनकी रक्षा सैयां,

जो तेरी ख़ुशी वो मेरी ख़ुशी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।