मुझे जाना साई के देश रे

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे जाना साई के देश रे,

कर जोगन वाला वेश रे,

मुझे जाना साई के देश रे

प्रेम में अखियाँ बरस रही है ,

उन से मिलन को तरस रही है,

उन्हें देना ये सन्देश रे,

मुझे जाना साई के देश रे

मैं तो हु विपदा की मारी,

भटक रही है इक दुखयारी,

मेरे खुले पड़े है केश रे,

मुझे जाना साई के देश रे

तरसु पल पल आवे कल न,

कब होगा मेरा साईं से मिलना,

मेरे दिल पे लगे है ठेस रे ,

मुझे जाना साई के देश रे

नींद न आई चैन न आया,

नागर के कल सपने में आया,

वो शिर्डी का दरवेश रे,

मुझे जाना साई के देश रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।