हर हर गंगे

महेन्द्र कपूर
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हर हर गंगे,

हर हर गंगे हर हर गंगे

अमृत सा तेरा पानी तू नदियों की महारानी

माँ तू है जग कल्याणी,

हर हर गंगे, हर हर गंगे ।

भागीरथ के तप से तू पिघली, निकली ब्रह्म कमंडल से ।

निर्मल रहते पावन होते माँ हम तेरे ही जल से ।

तेरे जल में जीवन बहता, मुक्ति का साधन रहता, मन पुलकित होकर कहता,

हर हर गंगे, हर हर गंगे ।

हर हर गंगे, हर हर गंगे ॥

गायत्री सी सिद्धि दायनी, गीता जैसा ज्ञान है तू ।

सारे जग में माँ गंगे इस भारत की पहचान है तू ।

तू शोभा कैलाशी की, गरिमा भारतवासी की, है शान तू ही काशी की,

हर हर गंगे, हर हर गंगे ।

हर हर गंगे, हर हर गंगे ॥

बही तेरी धारा जिस जिस पथ से वही वही पथ बना तीरथ है ।

तुझको पाकर धन्य हुए हम अमर हुआ भागीरथ है ।

कहीं हरिद्वार कहीं संगम, कहीं गंगा सागर अनुपम, हर तीरथ तेरा उत्तम,

हर हर गंगे, हर हर गंगे ।

हर हर गंगे, हर हर गंगे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।