गोरा तेरी भंगिया कमाल रे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरा इनकार करना नही ठीक है

मेरा भंगिया से नाता बड़ा नजदीक है

मेरी इतनी सी बात जरा कर ख्याल रे

गोरा तेरी भंगिया बड़ी कमाल रे

घोट के तू ल्यादे ना करे टाल रे

भांग बिना रंग नही जमता है गोरा

हरि हरि भंगिया का नही कोई तोड़ा

बार बार करता हूं ये सवाल रे

गोर बही करती हुआ बेहाल रे

घोट के तू ल्यादे ना करे टाल रे

मुझको तू गोरा क्यों इतना सताए

घोटती ना भंगिया क्यों नखरे दिखाए

इतना क्यों तरसाए कर निहाल रे

ध्यान नही लगता मेरी कर संभाल रे

घोट के तू ल्यादे ना करे टाल रे

अब तो पिला दे तू भर भर के लोटा

भांग बिना हो जाग रोला यो मोटा

हो जागी आँख मेरी लाल लाल रे

झगड़े न गोरा कोई हल निकाल रे

घोट के तू ल्यादे ना करे टाल रे

जब जब तू गुस्से में भंगिया पिलाए

भांग का नशा गोरा दुगना हो जाए

करती हरीश मस्त हाल चाल रे

मोहन कौशिक भंगिया तो है बवाल रे

घोट के तू ल्यादे ना करे टाल रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।