चल चली शिव भोले दी बारात

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चल चली शिव भोले दी बारात जग तो निराली भगतो ,

आज गोरा जी नाल होनी मुलाकात जग तो निराली भगतो

गल विच बिछुए सप लंकाये ने,

गज गज दाहड़ा केश वदाये ने,

हुंडी वेख के हैरान काएनात,

जग तो निराली भगतो

भुता ते चुड़ेला दी जनेत सारी आई है,

वेख वेख गला सारी करदी लुगाई है ,

सारी भोले दी है आज करा मात

जग तो निराली भगतो

गोरा दी सखियाँ ने शोर मचाया है

आखदियां बूढ़ा जेहा तेरे लड़ लाया है,

पाई लुक छुप गोरा जी ने झात

जग तो निराली भगतो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।