इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के

" कवि प्रदीप "
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॥ पावन पाठ ॥

पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के

अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के

मंज़िल पे आया मुल्क हर बला को टाल के

सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के

हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के

इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के

इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

देखो कहीं बरबाद ना होए ये बगीचा

इसको हृदय के खून से बापू ने है सींचा

रक्खा है ये चिराग़ शहीदों ने बाल के, इस देश को...

दुनिया के दांव पेंच से रखना ना वास्ता

मंज़िल तुम्हारी दूर है लम्बा है रास्ता

भटका ना दे कोई तुम्हें धोखे में डाल के, इस देश को...

ऐटम बमों के जोर पे ऐंठी है ये दुनिया

बारूद के इक ढेर पे बैठी है ये दुनिया

तुम हर कदम उठाना ज़रा देख भाल के, इस देश को...

आराम की तुम भूल भुलय्या में ना भूलो

सपनों के हिंडोलों पे मगन होके ना झूलो

अब वक़्त आ गया है मेरे हँसते हुए फूलों

उठो छलाँग मार के आकाश को छू लो

तुम गाड़ दो गगन पे तिरंगा उछाल के, इस देश को...

फिल्म - जागृति (1954)

संगीत - हेमंत कुमार

गीतकार - " कवि प्रदीप "

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।