बाबा भर्फानी मेरा भोला भर्फानी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डम डम डमरू भाजे शंकर कैलाश पे नाचे,

तांडव करे ोगडदानी धरती अम्बर सब कांपे,

कोई न माया शिव शमभू की जानी,

बाबा भर्फानी मेरा भोला भर्फानी,

मस्तक चन्दर शीश पे गंगा,

नाचे योगी मस्त मलंगा ,

गल तिरशूल सर्प की माला ोड़ी तन बंगामबर अंगा,

क्रोध रूप जाने ऋषि मुनि ग्यानी,

बाबा भर्फानी मेरा भोला भर्फानी,

शिव का रूप भयंकर भारी दर से कांपे सृष्टि सारी,

हाथ जोड़ कर देवता सारे करे परनाम सब नर नारी,

वीणा भजा के नारद महिमा भाखानि,

बाबा भर्फानी मेरा भोला भर्फानी,

महाकाल प्रभु विकाल दरसी नैन तीसरे से ज्वाला बरसी,

नारायण तब अस्तुति की नि शिव मुख देख ज्योत तब हरसि,

महाकाल सोनू धुनि रमानी,

बाबा भर्फानी मेरा भोला भर्फानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।