भोला भंडारी रे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बम बम भोले नाथ

जय जय शिव शंकर

तन पे भबूती, नंदी सवारी,

भोला भंडारी रे, भोला भंडारी ll

भोला भंडारी रे, भोला भंडारी ll

डंमरू की डम डम, शिव भोले बम बम,

लीला है न्यारी रे, भोला भंडारी,

तन पे भबूती,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

आकाश कैलाश, परबत को चूमे

डंमरू की लैह पर, नंदी भी झूमे ll

ताँडव करे जब, जब त्रिपुरारी ll,

भोला भंडारी रे, भोला भंडारी,

तन पे भबूती,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

महिमा न जाने रे, शिव की बखानी

पल में है शिव, पल में गौरा रानी ll

अर्ध अंग नर और, अर्ध अंग नारी ll,

भोला भंडारी रे, भोला भंडारी,

तन पे भबूती,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कोई कहे रे, भोला भंडारी

कोई कहे, शँकर त्रिपुरारी ll

तुम जानो भोले, महिमा तुम्हारी ll,

भोला भंडारी रे, भोला भंडारी,

तन पे भबूती,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।