को माता को पिता हमारे

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

को माता को पिता हमारे

कब जनमत हमको तुम देख्यो,

हँसी लगत सुन बैन तुम्हारे

कब माखन चोरी कर खायो,

कब बांधे महतारी

दुहत कौन सी गइया चारत,

बात कही जे भारी

तुम जानत मोहि नंद ढ़िठौना,

नंद कहा ते आये

हम पूरन अविगत अविनासी,

माया ठगनी भुलाये

ये सुन ग्वालिन सब मुस्कानी,

हरष मगन हो उठाये

सूर श्याम जो निठुरैं सबहीं,

मात पिता हूँ नहीं माने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।