भोले जी अपनी शादी में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले शंकर जी दूल्हा बन आये,

भोले जी अपनी शादी में क्या गजब ढाये

मेरे भोले बाबा जी की क्या बात है,

भोला दूल्हा बने आज की रात है,

चंदा गंगा का सेहरा सजाये,

भोले जी अपनी शादी में

माला सर्पो की देखो गले सजे है,

तन पर बादम्बर लिपटा नंदी साथ है,

तन पे भस्मी भभूति लगाए,

भोले जी अपनी शादी में

देखो कैसे अनोखी ये बारात है,

देख के गोरा मैया की अरदास है,

गोरा मैया जी अर्ज लगाए,

भोले जी अपनी शादी में

भेष बदलो भयंकर मेरे नाथ रे,

संग में जाना विधा होके है साथ में,

सोना मुखड़ा भोले ने दिखाए,

भोले जी अपनी शादी में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।